Allah ki Qudrat
दुनिया में अगर कोई मामूली सी चीज़ भी गहराई से देखी जाए,तो उसमें अल्लाह तआला की कुदरत के बेशुमार निशानात नज़र आते हैं।
उन्हीं अजाइबात में से एक है मुर्गी के पेट में अंडे का तशकीली सफ़र।
साइंस बताती है कि अंडे का बनना एक मुकम्मल तर्तीब से होता है,
पहले पीला हिस्सा (yolk) ओवरी से निकलता है।
फिर उस पर सफ़ेदी (albumen) की तह बनती है।
इसके बाद चारों तरफ़ झिल्लियाँ (membranes) तैयार होती हैं।
आख़िर में उस पर सख़्त खोल (shell) चढ़ा दिया जाता है।
पूरा अंडा 24 घंटे में तैयार होकर बाहर आ जाता है।
यानी हर रोज़ एक नया और मुकम्मल अंडा, अल्लाह की हिकमत और तदबीर का ज़िंदा सबूत।
सोचिए..
किसने ये नज़्म बनाई कि पहले ज़र्दी (yolk) बने, फिर सफ़ेदी, फिर झिल्ली, फिर खोल?
किसने कैल्शियम का सही मिक़दार तय किया कि खोल न बहुत सख़्त हो और न बहुत नर्म?
किसने ये तर्तीब रखी कि हर 24 घंटे में एक मुकम्मल अंडा तैयार हो जाए?
ये सब किसी लैब का एक्सपेरिमेंट नहीं रब्बुल आलमीन की तदबीर है।
अल्लाह तआला फ़रमाता है,
हम तुम्हें अपनी निशानियों में से दिखाएँगे, ताकि तुम पहचान लो।
मुर्गी के पेट में अंडे का बनना भी उन्हीं निशानियों में से एक है जो इंसान को अपने ख़ालिक़ की कुदरत का एहसास दिलाती है।
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